- परिचय / Introduction — Yojna Aayog Kya Tha?
- इतिहास / History — Yojna Aayog Kaise Bana?
- योजना आयोग के विवरण / Planning Commission Details
- सदस्य / Members of Planning Commission & NITI Aayog
- उद्देश्य / Objectives — Yojna Aayog Ke Lakshya
- नीति आयोग का गठन / Composition of NITI Aayog
- Planning Commission vs NITI Aayog — मुख्य अंतर
- पंचवर्षीय योजनाएँ / Five-Year Plans — एक नज़र
- Expert Tip — परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए ज़रूरी बातें
- Common Mistakes — यह गलत धारणाएँ मत रखें
- Real Benefit — Yojna Aayog का असल योगदान
- FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- Important Links — Official Sources
- निष्कर्ष / Conclusion
परिचय / Introduction — Yojna Aayog Kya Tha? (Planning Commission of India)
योजना आयोग (Planning Commission) भारत सरकार की एक सलाहकार संस्था (advisory body) थी जिसे 15 मार्च 1950 को एक सरकारी प्रस्ताव (Government of India Resolution) के ज़रिए स्थापित किया गया। यह संस्था संविधान में कहीं उल्लेखित नहीं थी — यानी यह पूरी तरह गैर-संवैधानिक (non-constitutional) और गैर-सांविधिक निकाय (non-statutory body) थी। इसका मतलब यह है कि इसे किसी कानून या संसदीय अधिनियम के ज़रिए नहीं, बल्कि सरकार के एक executive order से बनाया गया था।
इस आयोग का पदेन अध्यक्ष (ex-officio chairperson) देश का प्रधानमंत्री होता था। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इसके पहले अध्यक्ष बने। योजना आयोग का मुख्यालय योजना भवन, नई दिल्ली में था। इस संस्था ने देश की आर्थिक नीति (economic policy) तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाई और पंचवर्षीय योजनाएँ (Five-Year Plans) तैयार करने का काम किया।
इस सलाहकारी निकाय (advisory body) को 65 वर्षों बाद 1 जनवरी 2015 को भंग कर दिया गया जब नरेंद्र मोदी सरकार ने इसके स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog) — यानी National Institution for Transforming India (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) — की स्थापना की। 17 अगस्त 2014 को ही मोदी सरकार ने इसके विघटन (dissolution) का संकेत दे दिया था।
इतिहास / History — Yojna Aayog Kaise Bana?
15 अगस्त 1947 को जब भारत को स्वतंत्रता (independence) मिली, तब देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हालत में थी। ब्रिटिश सरकार ने भारत को एक अर्ध विकसित अर्थव्यवस्था (semi-developed economy) के रूप में छोड़ा था जो वैश्विक अर्थव्यवस्था (global economy) में बहुत पिछड़ी हुई थी। ऐसे में नए भारत को एक ठोस आर्थिक नियोजन (economic planning) की ज़रूरत थी।
दरअसल, आर्थिक नीति (economic policy) और केंद्रीकृत आर्थिक योजना (centralised economic planning) का विचार पूरी तरह नया नहीं था। सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में 1938 में ही राष्ट्रीय योजना समिति (National Planning Committee) बनाई गई थी, जिसमें मेघनाद साहा और एम. विश्वेश्वरैया जैसे महान वैज्ञानिक और अभियंता शामिल थे। इस समिति में के.सी. नियोगी भी महत्वपूर्ण भूमिका में थे।
इसके बाद 1944 और 1946 में सलाहकार योजना बोर्ड (Advisory Planning Board) बनाया गया। जोसेफ स्टालिन के नेतृत्व में सोवियत संघ (USSR) ने 1920 के दशक से ही पंचवर्षीय योजना (Five-Year Plan) मॉडल अपनाकर एक कमज़ोर अर्थव्यवस्था को विश्व की महाशक्ति बना दिया था। रूसी मॉडल (Russian model) की इस सफलता ने नेहरू को बहुत प्रभावित किया।
अंततः मंत्रीमंडलीय प्रस्ताव (Cabinet Resolution) के ज़रिए 15 मार्च 1950 को योजना आयोग (Planning Commission) का औपचारिक गठन हुआ। गुलजारीलाल नंदा इसके पहले उपाध्यक्ष (first Deputy Chairman) बने। नेहरूवादी विरासत (Nehruvian legacy) के इस संस्थान ने पूर्व-स्वतंत्रता (pre-independence) की सोच को स्वतंत्रता-पश्चात् (post-independence) नीति में बदला।

योजना आयोग के विवरण / Planning Commission Details — Structure और कार्य
योजना आयोग (Planning Commission) का पदेन अध्यक्ष (ex-officio chairperson) देश का प्रधानमंत्री होता था। इसमें एक उपाध्यक्ष (Deputy Chairman) होता था जो कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister) के दर्जे का होता था — यही व्यक्ति आयोग का practical head था। इसके अलावा कई पूर्णकालिक सदस्य (full-time members) होते थे जो अर्थशास्त्र, विज्ञान, कृषि, उद्योग, वाणिज्य और प्रशासन जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते थे।
आयोग में वित्त मंत्री, गृह मंत्री, रसायन मंत्री और उर्वरक, कानून, सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विभागों के मंत्री भी अंशकालिक सदस्य के रूप में शामिल होते थे। आयोग का मुख्य काम था देश के भौतिक संसाधन (physical resources) और मानव संसाधन (human resources) तथा पूंजी संसाधन (capital resources) का संतुलित उपयोग (balanced utilisation) सुनिश्चित करना।
आयोग की नीतियाँ (policies) बनाना, प्रगति मूल्यांकन (progress assessment) करना और राष्ट्रीय संसाधनों की इष्टतम वृद्धि (optimal growth) के लिए रणनीति तैयार करना इसके प्रमुख दायित्व थे। 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012–2017) योजना आयोग की अंतिम योजना थी, जिसके बाद इस नेहरूवादी विरासत (Nehruvian legacy) वाले संस्थान का विघटन (dissolution) हुआ।
यह आयोग संसद (Parliament) के प्रति उत्तरदायी नहीं था — यह सीधे प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अधीन काम करता था। इसकी recommendations बाध्यकारी नहीं थीं, लेकिन व्यवहार में इन्हें लागू किया जाता था।
सदस्य / Members of Planning Commission & NITI Aayog
योजना आयोग (Planning Commission) में सार्वजनिक जीवन (public life) के विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञ (experts) शामिल किए जाते थे। अर्थशास्त्र (economics), कृषि (agriculture), रक्षा (defense) और पर्यावरण (environment) जैसे क्षेत्रों के जानकार इसके पूर्णकालिक सदस्य (full-time members) होते थे।
NITI Aayog में प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष (ex-officio chairperson) होते हैं। इसमें एक उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson) और एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer / CEO) होता है जो सचिव स्तर (Secretary-level) का अधिकारी होता है। इसके अलावा पूर्णकालिक सदस्य (full-time members) और अंशकालिक सदस्य (part-time members) दोनों होते हैं।
NITI Aayog की गवर्निंग काउंसिल (Governing Council) में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री (Chief Ministers) और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के उपराज्यपाल (Lieutenant Governors) शामिल होते हैं जिन्हें विधानमंडल (legislature) है। संसद सदस्य (Members of Parliament) इसके सदस्य नहीं होते। सर्च कमेटी (Search Committee) की सिफारिश पर और प्रधानमंत्री अनुशंसा (Prime Minister’s recommendation) के आधार पर नियुक्तियाँ होती हैं। विशेष आमंत्रित (Special Invitees) के रूप में केंद्रीय मंत्री भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
| पद / Post | Planning Commission | NITI Aayog |
|---|---|---|
| अध्यक्ष / Chairperson | प्रधानमंत्री (पदेन) | प्रधानमंत्री (पदेन) |
| उपाध्यक्ष / Deputy/Vice Chair | उपाध्यक्ष (Cabinet rank) | Vice-Chairperson |
| CEO | नहीं था | मुख्य कार्यकारी अधिकारी |
| राज्यों की भागीदारी | सीमित | गवर्निंग काउंसिल में मुख्यमंत्री |
| अंशकालिक सदस्य | केंद्रीय मंत्री | Part-time members (विशेषज्ञ) |
उद्देश्य / Objectives — Yojna Aayog Ke Lakshya (Goals)
योजना आयोग और उसके उत्तराधिकारी NITI Aayog दोनों के उद्देश्यों में कुछ समानताएँ हैं, लेकिन approach बिल्कुल अलग है। आयोग का मुख्य उद्देश्य था देश में जीवन स्तर (living standards) को ऊपर उठाना और संसाधन दोहन (resource utilisation) को बेहतर बनाना।
उत्पादन वृद्धि (production increase) और रोजगार के अवसर (employment opportunities) पैदा करना, देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था (national economy) के लिए एकीकृत परिप्रेक्ष्य योजना (integrated perspective planning) तैयार करना — ये इसके core उद्देश्य थे। विभिन्न क्षेत्रों के बीच अंतर-क्षेत्रीय प्राथमिकता (inter-sectoral priorities) तय करना और संतुलन (balance) बनाना भी इसका काम था।
NITI Aayog के उद्देश्यों में सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को बढ़ावा देना और सशक्त राज्य, सशक्त राष्ट्र (empowered states, empowered nation) की नीति अपनाना शामिल है। यह नोडल एजेंसी (nodal agency) के रूप में केंद्र, राज्य और मंत्रालयों के बीच समन्वय (coordination) करती है। ग्राम स्तर (village level) तक योजनाओं को पहुँचाने के लिए बॉटम-अप दृष्टिकोण (bottom-up approach) अपनाया जाता है। महिलाओं और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए सरकार की Swadhar Yojana 2026 जैसी schemes इसी नीतिगत सोच का हिस्सा हैं।
इसके अलावा NITI Aayog एक नीति थिंक टैंक (policy think tank) की तरह काम करता है — शैक्षिक संस्थानों (educational institutions) और नीति अनुसंधान (policy research) से जुड़कर ज्ञान, नवाचार और उद्यमशीलता (knowledge, innovation and entrepreneurship) को बढ़ावा देता है। सतत विकास (sustainable development) और न्यायसंगत विकास (equitable development) के लिए दीर्घकालिक नीति (long-term policy) और कार्यक्रम ढाँचा (programme framework) तैयार करना इसका अहम काम है।
Planning Commission निर्देशात्मक (directive) था — यह राज्यों को funds allocate करता था और plans impose करता था। NITI Aayog सलाहकार (advisory) है — यह सिर्फ recommend करता है, funds distribute नहीं करता। Funds allocation का काम अब Finance Commission और Union Budget के ज़रिए होता है।
नीति आयोग का गठन / Composition of NITI Aayog — पूरी संरचना
1 जनवरी 2015 को नरेंद्र मोदी सरकार ने NITI Aayog (National Institution for Transforming India / राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) की स्थापना की। इसका संस्थागत ढाँचा (institutional structure) Planning Commission से काफी अलग है।
NITI Aayog में प्रधानमंत्री अध्यक्ष (Chairperson) होते हैं। इसके नीचे गवर्निंग काउंसिल (Governing Council) होती है जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री (Chief Ministers) और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के उपराज्यपाल शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त जरूरत के अनुसार क्षेत्रीय परिषद (Regional Councils) भी बनाई जा सकती हैं।
इसमें विशेष आमंत्रित (Special Invitees) के रूप में विश्वविद्यालयों (universities) और शोध संस्थानों (research institutions) के विशेषज्ञ भी शामिल किए जाते हैं। केंद्रीय मंत्रिपरिषद (Union Cabinet) के कुछ मंत्री पदेन सदस्य (ex-officio members) होते हैं। अंशकालिक सदस्य (part-time members) को बारी के आधार (rotational basis) पर और विशिष्ट कार्यकाल (fixed tenure) के लिए नियुक्त किया जाता है।
मुख्य संचालन अधिकारी (Chief Executive Officer / CEO) की नियुक्ति निश्चित कार्यकाल (fixed tenure) के लिए की जाती है और यह सचिव स्तर (Secretary-level) का अधिकारी होता है। NITI Aayog का अपना एक सचिवालय (Secretariat) है जो इसके day-to-day कामकाज सँभालता है।
Planning Commission vs NITI Aayog — मुख्य अंतर (Key Differences)
योजना आयोग (Planning Commission) और नीति आयोग (NITI Aayog) दोनों की नीतिगत गतिशीलता (policy dynamics) और केंद्र व राज्य स्तर (centre and state level) पर कार्य करने के तरीके बिल्कुल अलग हैं।
| विषय / Aspect | Planning Commission | NITI Aayog |
|---|---|---|
| स्थापना / Founded | 15 मार्च 1950 | 1 जनवरी 2015 |
| Approach | Top-down / केंद्रीकृत | Bottom-up / सहकारी संघवाद |
| Fund Allocation | हाँ — राज्यों को funds देता था | नहीं — सिर्फ advisory role |
| राज्यों की भूमिका | सीमित, passive | सक्रिय — Governing Council में |
| Five-Year Plans | हाँ — 12 योजनाएँ बनाईं | नहीं — अब 15-year vision |
| तकनीकी परामर्श / Tech Advisory | सीमित | व्यापक — think tank भूमिका |
| कल्याणकारी राज्य / Welfare State | मिश्रित अर्थव्यवस्था पर आधारित | Market-friendly + inclusive |
पंचवर्षीय योजनाएँ / Five-Year Plans — एक नज़र (Overview)
पंचवर्षीय योजनाएँ (Five-Year Plans) योजना आयोग की सबसे महत्वपूर्ण देन थीं। सोवियत संघ (Soviet Union) के केंद्रीकृत आर्थिक योजना (centralised economic planning) मॉडल से प्रेरित होकर भारत ने यह system अपनाया। पहली योजना से लेकर 12वीं योजना तक — हर plan में अलग-अलग प्राथमिकताएँ थीं जो आर्थिक नीतियाँ (economic policies) और कल्याणकारी राज्य (welfare state) के निर्माण में मददगार रहीं।
मिश्रित अर्थव्यवस्था (mixed economy) का framework अपनाते हुए भारत ने स्वतंत्रता (independence) के बाद आर्थिक विकास (economic development) के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। नेहरूवादी विरासत (Nehruvian legacy) में भारी उद्योगों और सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई।
| योजना / Plan | अवधि / Period | मुख्य उद्देश्य / Main Focus |
|---|---|---|
| पहली योजना / 1st Plan | 1951–56 | कृषि और बाँध निर्माण |
| दूसरी योजना / 2nd Plan | 1956–61 | भारी उद्योग (Mahalanobis Model) |
| तीसरी योजना / 3rd Plan | 1961–66 | आत्मनिर्भरता — युद्धों से बाधित |
| Plan Holiday | 1966–69 | तीन Annual Plans |
| चौथी योजना / 4th Plan | 1969–74 | गरीबी हटाओ — इंदिरा गाँधी |
| पाँचवीं योजना / 5th Plan | 1974–79 | गरीबी उन्मूलन, आत्मनिर्भरता |
| छठी योजना / 6th Plan | 1980–85 | आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत |
| सातवीं योजना / 7th Plan | 1985–90 | Technology, Productivity |
| आठवीं योजना / 8th Plan | 1992–97 | LPG सुधार — मानव संसाधन |
| नौवीं योजना / 9th Plan | 1997–2002 | सामाजिक न्याय और समानता |
| दसवीं योजना / 10th Plan | 2002–07 | 8% GDP growth target |
| ग्यारहवीं योजना / 11th Plan | 2007–12 | Inclusive Growth |
| बारहवीं योजना / 12th Plan | 2012–17 | Faster, More Inclusive Growth |
तीसरी और चौथी पंचवर्षीय योजना के बीच 1966 से 1969 तक तीन Annual Plans चलाए गए — इसे Plan Holiday कहते हैं। इसकी वजह थी 1962 का भारत-चीन युद्ध, 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध और उसके बाद का अकाल।
Expert Tip — परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए ज़रूरी बातें
गैर-संवैधानिक (non-constitutional) का मतलब है — संविधान में इसका कोई ज़िक्र नहीं। गैर-सांविधिक (non-statutory) का मतलब है — संसद के किसी अधिनियम से नहीं बना। Planning Commission और NITI Aayog दोनों गैर-संवैधानिक और गैर-सांविधिक निकाय हैं — यह UPSC और राज्य PCS में बहुत पूछा जाता है।
गुलजारीलाल नंदा (Gulzarilal Nanda) Planning Commission के पहले उपाध्यक्ष (first Deputy Chairman) थे। वही बाद में दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री भी बने। यह fact exam में अक्सर trick question के रूप में आता है।
के.सी. नियोगी (K.C. Neogi) की अध्यक्षता में 1946 में सलाहकार योजना बोर्ड (Advisory Planning Board) बना था — इसी की recommendations पर Planning Commission की नींव रखी गई। यह context समझना ज़रूरी है।
NITI = National Institution for Transforming India = राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान। और Aayog का मतलब है Commission/Body। यह 17 अगस्त 2014 को announce हुआ और 1 जनवरी 2015 से active हुआ।
Common Mistakes — यह गलत धारणाएँ मत रखें
बहुत लोग मानते हैं कि Planning Commission का ज़िक्र संविधान में है — यह गलत है। यह पूरी तरह गैर-संवैधानिक (non-constitutional) और एक सरकारी प्रस्ताव (Government Resolution) के ज़रिए बनाई गई कार्यकारी संस्था (executive body) थी।
NITI Aayog सिर्फ नाम बदलना नहीं था — इसकी संरचना, उद्देश्य और approach पूरी तरह अलग हैं। Planning Commission funds allocate करता था; NITI Aayog सिर्फ सलाहकार (advisory) भूमिका निभाता है।
पंचवर्षीय योजनाएँ (Five-Year Plans) केवल Planning Commission ने बनाईं। NITI Aayog ने इन्हें बंद कर दिया। अब 15-year vision document, 7-year strategy और 3-year action agenda का system है।
राष्ट्रीय विकास परिषद (National Development Council / NDC) Planning Commission से अलग एक और संस्था थी जिसमें प्रधानमंत्री, सभी मुख्यमंत्री और Planning Commission के सदस्य शामिल थे। NITI Aayog ने इसे भी effectively replace कर दिया है।
Real Benefit — Yojna Aayog Ka Asli Yogdan (Planning Commission’s Legacy)
योजना आयोग (Planning Commission) ने 65 वर्षों में भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (agrarian economy) को एक विविधीकृत अर्थव्यवस्था (diversified economy) में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज का IT sector, manufacturing base और बुनियादी ढाँचा (infrastructure) काफी हद तक इन्हीं पंचवर्षीय योजनाओं की देन है।
आर्थिक नीतियाँ (economic policies) के क्षेत्र में Planning Commission ने कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे (infrastructure) जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में integrated planning दी। सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन (socio-economic transformation) और क्षेत्रीय विषमता (regional disparity) कम करने में इसका योगदान अतुलनीय रहा। कारीगरों और शिल्पकारों के लिए आज की PM Vishwakarma Yojana 2026 इसी planning की विरासत को आगे बढ़ाती है।
संस्थागत सुधार (institutional reform) के तौर पर NITI Aayog की स्थापना एक ज़रूरी कदम था — क्योंकि 21वीं सदी की नीतिगत गतिशीलता (policy dynamics) और बदलती global economic realities के लिए एक नए, flexible think tank की ज़रूरत थी। सहकारी संघवाद (cooperative federalism) और सतत विकास (sustainable development goals) के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए NITI Aayog ने शासन व्यवस्था सुधार (governance reform) की नई राह खोली।
| क्षेत्र / Sector | Planning Commission का योगदान |
|---|---|
| कृषि / Agriculture | Green Revolution की नींव — 1st और 2nd Plan में कृषि को priority |
| उद्योग / Industry | BHEL, SAIL, NTPC जैसे PSUs की स्थापना |
| शिक्षा / Education | IITs, IIMs, AIIMS की स्थापना का framework |
| ऊर्जा / Energy | बाँधों और विद्युत परियोजनाओं का विस्तार |
| GDP Growth | 1951 में ~3% से 2014 में ~7%+ तक पहुँचना |

FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. Yojna Aayog Ka Gathan kab hua? (Planning Commission कब बना?)
योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना 15 मार्च 1950 को भारत सरकार के एक सरकारी प्रस्ताव (Government of India Resolution) के ज़रिए हुई। इसके पहले अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे और पहले उपाध्यक्ष गुलजारीलाल नंदा थे।
Q2. Planning Commission और NITI Aayog में क्या फर्क है?
Planning Commission top-down approach से काम करता था और राज्यों को funds allocate करता था। NITI Aayog bottom-up approach और सहकारी संघवाद (cooperative federalism) पर आधारित है — यह सिर्फ advisory role में है, funds distribute नहीं करता। NITI Aayog में राज्यों के मुख्यमंत्री Governing Council के सदस्य हैं, जो Planning Commission में नहीं था।
Q3. भारत में कुल कितनी पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई गईं?
भारत में कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएँ (Twelve Five-Year Plans) बनाई गईं — 1951 से 2017 तक। 12वीं योजना (2012–2017) Planning Commission की अंतिम योजना थी। NITI Aayog ने पंचवर्षीय योजनाओं की जगह 15-year vision, 7-year strategy और 3-year action agenda का नया framework अपनाया।
Q4. Planning Commission क्यों बंद हुआ?
नरेंद्र मोदी सरकार ने माना कि Planning Commission का top-down, centralised model 21वीं सदी की ज़रूरतों के लिए उपयुक्त नहीं रहा। राज्यों को अधिक autonomy देने, सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को बढ़ावा देने और एक flexible policy think tank बनाने के उद्देश्य से 1 जनवरी 2015 को NITI Aayog बनाया गया।
Q5. NITI Aayog का Full Form क्या है?
NITI Aayog = National Institution for Transforming India — हिंदी में राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान। इसकी स्थापना 1 जनवरी 2015 को हुई और इसका ऐलान 17 अगस्त 2014 को किया गया था।
Important Links — Official Sources और Reference
🏛️ भारत सरकार / Government of India: india.gov.in
📚 Planning Commission Archives: planningcommission.gov.in (archived)
📋 Five-Year Plans Reference: NITI Aayog — Plan Documents
🎯 NITI Aayog — SDG India Index: sdgindiaindex.niti.gov.in
निष्कर्ष / Conclusion — Yojna Aayog Ka Gathan: ek Aitihasik Kadam
योजना आयोग (Planning Commission) का गठन 1950 में स्वतंत्र भारत के नीति-निर्माण में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर था। इसने बारह पंचवर्षीय योजनाओं (Twelve Five-Year Plans) के ज़रिए देश की आर्थिक नीति रणनीति (economic policy strategy) को आकार दिया। कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे (infrastructure) जैसे हर क्षेत्र में इसने कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (agrarian economy) को एक विविधीकृत अर्थव्यवस्था (diversified economy) में बदलने का काम किया।
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस नेहरूवादी विरासत (Nehruvian legacy) वाली संस्था का विघटन (dissolution) और उसके स्थान पर NITI Aayog की स्थापना एक ज़रूरी संस्थागत सुधार (institutional reform) थी। आज NITI Aayog एक नीति थिंक टैंक (policy think tank) के रूप में सहकारी संघवाद (cooperative federalism) और सतत विकास (sustainable development) के लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहा है।
स्वतंत्र भारत (independent India) की आर्थिक नियोजन (economic planning) की यह यात्रा — Planning Commission से NITI Aayog तक — भारतीय शासन व्यवस्था की परिपक्वता और बदलती ज़रूरतों का प्रमाण है। रोज़गार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana 2026 जैसी schemes इसी नीतिगत यात्रा की अगली कड़ी हैं। किसी भी competitive exam — UPSC, State PCS, SSC — में Yojna Aayog Ka Gathan एक बेहद महत्वपूर्ण topic है जिसे गहराई से समझना ज़रूरी है।
इस article में दी गई जानकारी NITI Aayog की official website, Planning Commission के archived documents और भारत सरकार की आधिकारिक notifications के आधार पर तैयार की गई है। Competitive exams की तैयारी के लिए आधिकारिक sources से cross-verify ज़रूर करें — क्योंकि नीतियाँ और संरचना समय-समय पर बदलती रहती है।

